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भारत AI सुपर पावर बनने के करीब, जानिए चीन-अमेरिका की टक्कर कहां है खड़ा



भारत और चीन के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस के कई फ़ैक्टर हैं - तकनीकी, भौगोलिक, राजनीतिक। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सुपरपावर बनने की कड़ी स्पर्धा चीन और अमेरीका के बीच है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आंकडें देखें तो इनमें भारत अभी लगभग दसवें पाएदान पर है। गौर करने की बात ये है इस क्षेत्र में बदलाव इतनी तेजी से होते हैं कि कुछ ही साल में भारत सबसे बड़े सुपरपावर के रूप में उभर सकता है।

Integration Wizard Solution के सीईओ kunal Kislay ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की इस रेस में इन दिनों विश्व के अधिकतर देश तीन में से एक खेमे में हैं - अमरीका के साथ, चीन के साथ या फिर स्वतंत्र और तटस्थ। जैसा कि बटरफ़्लाई इफ़ेक्ट में ज़ाहिर होता है, पूरी दुनिया एक कॉज़-एफ़्फ़ेट रिलेशन में बंधी हुई है। हर घटना का प्रभाव किसी दूसरी घटना को जन्म देता है जिसका पूर्वानुमान करना मुश्किल है। कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया, इस विशाल स्तर पर लड़ने में पूरी दुनिया के देशों ने सबसे एडवांस टेक्नॉलजी को अडॉप्ट किया। कैमरा विज़न से मास्क के इस्तेमाल, सोशल डिस्टन्सिंग और कांटैक्ट ट्रेसिंग में मदद मिली। हर देश के कई सारे यूज केसेस हैं, विश्व में पहली बार इस व्यापक स्तर से किसी तकनीक का इस्तेमाल हुआ। भारत में इस समय लगभग 2000 AI स्टार्ट-अप्स हैं। कई सारे एंटरप्राइजेज इन सॉल्यूशंस का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे इस टेक्नॉलजी में एक अप्रत्याशित उछाल आया है।

चीन ने 2017 में एक तीन स्टेप का प्रोग्राम शुरू किया, जिससे कि 2030 तक वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स का वर्ल्ड लीडर बन सके। प्लान के मुताबिक AI की पढ़ाई के लिए यूनवर्सिटीज बनाई गई और AI का इस्तेमाल करने के लिए इंडस्ट्री को सरकार की तरफ से कई सारी छूट और प्रोत्साहन दिया गया। चीन का मुख्य उद्देश्य 2030 तक लगभग 150 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री स्थापित करना और इसका इस्तेमाल मिलिट्री और स्मार्ट सिटीज के लिए करना है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेन्स के कई सारे पेटेंट चीन के पास हैं और वहां इस विषय पर रिसर्च और ऐप्लिकेशन दोनों हो रहा है।

भारत में नीति आयोग ने 2019 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स के लिए संस्थागत तरीक़े से काम करना शुरू किया है। इस साल जून में Ministry of Electronics and Information Technology के National e-Governance

Division के समर्थन से Nasscom का National Artificial Intelligence (AI) Portal लाइव हो गया है। आंकड़ों की बात करें तो Orion Market Research के हिसाब से 2018 में भारत का आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स का ख़र्च 109.6% बढ़ कर 665 मिलियन डॉलर हो गया है। 2019-2025 तक भारत 39% कंपाउंड ऐन्यूअल ग्रोथ (CAGR) दर्ज करते हुए AI पर 11,781 मिलियन डॉलर सस्पेंड करेगा। अगर प्राइवेट इंडस्ट्रीज़ की बात करें तो गूगल ने भारत में डिजिटाईजेशन के लिए 10 बिलियन डॉलर का फंड दिया है। वहीं फेसबुक 5.7 बिलियन डॉलर Jio में इन्वेस्ट कर रहा है। भारत में इन दिनों चालीस लाख सॉफ्टवेयर डिवेलपर्स हैं और 2024 तक हम विश्व के सबसे ज़्यादा सॉफ्टवेयर डिवेलपर्स वाले देश हो जाएंगे। AI अडाप्ट कर इस पर काम करने वाले डिवेलपर्ज़ की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है।

जितना अधिक डेटा AI को फ़ीड किया जाएगा, इसका एनालिसिस उतना बेहतर होता जाएगा। इस कारण से दुनिया के अधिकतर AI सॉफ्टवेयर ओपन सोर्स हैं। चीन की कम्पनियों ने अब अपने ओपन सोर्स कोड कई सारी फ्री साइट्स से हटा लिए हैं, इससे न सिर्फ़ डिवेलपर्स बल्कि कई कम्पनियों में भी चीन के प्रति अविश्वास बढ़ा है। इसके अलावा AI का इस्तेमाल करके मानवाधिकार हनन के रिपोर्ट्स और चीन के सॉफ्टवेर और हार्डवेयर के इस्तेमाल में प्राइवसी के हनन के कई केस सामने आए हैं। अगर दुनिया के देश चीन पर भरोसा नहीं करेंगे तो उसके वर्ल्ड लीडर बनने का सवाल ही नहीं उठता। इन दिनों विश्व के कुछ देशों ने अपने 5G टेक्नॉलजी में चीन की कम्पनी Huwavei के साथ बने कांट्रैक्ट्स को कैन्सल कर दिया है। डॉनल्ड ट्रम्प ने कहा है कि चीन से प्राइवसी को ख़तरा है, हाल में UK के Huwavei के कांट्रैक्ट को कैन्सिल करने के बारे में ट्रम्प का कहना है कि ये उनके कहने से ही हुआ है। विश्व के देश जो चीन का एक ऑल्टरनेट तलाश रहे हैं, उन्हें भारत में सम्भावनाएं दिखती हैं। भारत में आता निवेश इस ट्रेंड को दर्शाता है। 15 जुलाई को Jio ने अनाउन्स किया कि उन्होंने पूरी तरह से भारत में निर्मित, विश्व-स्तरीय 5G सोल्यूशन बना लिया है और वे इसे अगले साल से टेस्ट करना शुरू कर

देंगे। अगर यह सोल्यूशन ठीक से काम करता है तो यह भारत ही नहीं, कई और देशों में इस्तेमाल किया जाएगा जो कि चीन का एक ऑल्टनेट तलाश रहे हैं।

कोरोना के बाद सुरक्षित तरीके से काम करने के लिए भारत की कई कम्पनियों ने AI सोल्यूशन अडाप्ट किए हैं। इनमें से कैमरा विज़न ने बहुत इंडस्ट्रीज़ के मैन्युफ़ैक्चरिंग फ़्लोर्स को बेहतर सुरक्षित किया है। प्रिवेंटिव मेंट्नेन्स - ऐक्सिडेंट होने के पहले उसे रोकते हैं। पैटर्न को देख कर उसे सुधारने के बारे में ध्यान दिलाते हैं। भारत के स्टार्ट-अप्स के ऐसे कई सोल्यूशन पूरी तरह से मेड इन इंडिया हैं। AI वीडियो और हाई रेजोल्यूशन इमेज के साथ काम करता है। कम्प्यूटर विज़न सॉल्यूशन लाइव कैमरा फ़ीड का विश्लेषण (analysis) करता है और रियल-टाइम परिणाम देता है। इसका इस्तेमाल मैन्युफ़ैक्चरिंग में ऐक्सिडेंट कम करने के लिए होता है - जैसे कि आग लगने के कुछ सेकंड में sms, whatsapp या पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम पर अलर्ट जाता है तो जल्दी आग बुझा दी जाती है। इसी तरह सोशल डिस्टन्सिंग के लिए लाइव फ़ीड में जब भी दो लोगों के बीच दूरी कम होती है, अलर्ट चला जाता है। एक नयी क्रांति - इंडस्ट्रीयल ऑटमेशन सोल्यूशन - इंडस्ट्री 4.0 की शुरुआत हो चुकी है । स्मार्ट मैन्युफ़ैक्चरिंग में इंटरनेट ऑप थिंग्स की मदद से मशीनें आपस में कनेक्टेड होती हैं और बिना किसी व्यक्ति के अपना काम ख़ुद कर सकती हैं और छोटे एरर को समय पर पहचान कर उन्हें ठीक कर सकती हैं या अलर्ट रेज कर सकती हैं ताकि व्यक्ति मशीन ख़राब होने के पहले उसे ठीक कर दे।

AI के डिप्लॉयमेंट में इस्तेमाल किया जाने वाला हार्डवेयर चीन में निर्मित होता है लेकिन उनकी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स NVIDIA और गूगल जैसी अमेरिका की कम्पनियों के पास हैं। AI की इस रेस के लिए ज़रूरी सॉफ़्टवेयर डिवेलपर भारत के पास हैं लेकिन पूरी तरह आत्मनिर्भर होने के लिए ज़रूरी है कि भारत AI चिप्स के मैन्युफ़ैक्चरिंग के लिए भी इंडस्ट्रीज़ स्थापित करे। रास्ता लम्बा और मुश्किल है लेकिन उम्मीद है और सही दिशा में उठाए गए क़दम हैं । सरकार के प्रोत्साहन और इन्वेस्टमेंट के साथ देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और एक दिन शायद चीन को पीछे छोड़ सकेगा। 


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