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कोरोना संकट (Coronavirus pandemic) के दौरान सामान्य रूप से अपराधों में कमी देखने को मिली है लेकिन ऑनलाइन चोरों (Online fraudsters) की चांदी हो गई है, जिसके चलते साइबर क्राइम (Cyber crime) की घटनाओं में बढ़ोतरी पाई गई है. कोरोना की वजह विश्व भर में फैली हुई चिंता का फायदा ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले धोखेबाज उठा रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ ही बहुत सारे देशों को निधि की आवश्यकता है जिसका फायदा उठाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले लोगों को सीधे ई-मेल भेजकर उन्हें अपने जाल में फंसा रहे हैं.
अमेरिका में साल 2018 मे अमेरिकी नागरिकों ने 427.71 अरब डॉलर समाजसेवा के लिए दान किए थे. ऑनलाइन चोर उनकी दान देने की इसी भावना का लाभ उठाने की फिराक में हैं. इसलिए गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक ने भी लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने की सलाह दी है.
महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक नॉटर्न संस्था ने लोगों से पैसे देने के पहले मदद मांगने वाली संस्था उसे देश या राज्य में पंजीकृत है या नहीं इसकी पड़ताल करने की सलाह दी है.
गूगल ने अपने यूज़र्स को सावधान करते हुए 1755 वार्निंग भेजे हैं. गूगल के थ्रेट एनालिसिस ग्रुप को पता चला है कि अनेकों हैकर्स भारत से ऑपरेट कर रहे हैं. ये हैकर्स WHO के नाम से ई-मेल तैयार करके उन्हें अमेरिका, कैनेडा, भारत, बहरीन, सायप्रस और इंग्लैंड की वित्तीय संस्थाओं और स्वास्थ्य संस्थाओं को फंसाने के लिए ई-मेल भेजते हैं.
माइक्रोसॉफ्ट ने लोगों को सावधान करते हुए कहा है कि कोविड-19 शब्द का इस्तेमाल करके लोगों को फिशिंग मेल भेजे जाते हैं. इस मेल में नेट्सपोर्ट मैनेजर नामक सिस्टम को डाउनलोड करने को कहा जाता है जिसके डाउनलोड होते ही आपके कंप्यूटर हैकर को एक्सेस हो जाते हैं और हैकर इस दौरान ऑनलाइन आपकी सारी जानकारी चुरा लेते हैं. एक्सर्ट्स का कहना है कि भारत में इस प्रकार की चोरी का खतरा बहुत ज्यादा है.

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