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माइक्रोसॉफ्ट अपने वेब ब्राउजर इंटरनेट एक्सप्लोरर को 2021 तक बंद कर देगी। यह वेब ब्राउजर आज के ब्राउजर के सामने टिक नहीं पाया, नतीजन इसको पांच फीसदी लोग ही आज इस्तेमाल करते हैं। अब कंपनी ने इसे बंद करने का फैसला लिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2003 तक माइक्रोसॉफ्ट का वेब ब्राउजर टॉप पर था। तकरीबन इंटरनेट के 95% लोग इस ब्राउजर के द्वारा ही चीजें देखा करते थे। लेकिन अब यह ब्राउजर सिर्फ इतिहास में ही रह जाएगा।
माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर के लोकप्रियता का कारण
जब ये लांच हुआ, तब कम लोगों के पास इंटरनेट था। लोगों को इंटरनेट पर काम करने में समस्याएं होती थी। इस ब्राउजर के आने के बाद लोगों का वेबसाइट पर काम करना आसान हो गया। जिसके कारण लोगों में इसकी लोकप्रियता बढ़ती चली गई।
पुलिस को रिकॉर्डस निकालने में, छात्रों को पढ़ाई की सामग्री पहुंचाने जैसे कामों में माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई। फिर बाजार में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, निंबज आए। जिसके बाद इसका खासा इस्तेमाल किया जाने लगा। सरकारी एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों के बारे में कहा जाता है कि वे अभी भी माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर का उपयोग कर रहे हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने इंटरनेट एक्सप्लोरर को 16 अगस्त 1995 को रिलीज किया था। ये इस तरह का पहला वेब ब्राउजर था जिसको लोगों ने हाथों हाथ लिया। लोग साइबर कैफे में इसी वेब ब्राउजर पर काम किया करते थे।
इसके बंद होने का कारण
आपको पता है माइक्रोसॉफ्ट का इंटरनेट एक्सप्लोरर दुनिया के सभी कंप्यूटर और लैपटॉप में पहले से ही इंस्टॉल्ड आता है। लेकिन क्रोम और मॉजिला फायरफॉक्स ने लगातार अपने को अपडेट किया। कुछ ना कुछ नया किया जिसके कारण लोगों में अपनी ज्यादा पहुंच बना ली। आज तकरीबन इंटरनेट का 66 % ट्रैफिक क्रोम ब्राउजर से आता है।
क्रोम में गूगल ट्रांसलेशन, बहुत सारे एक्सटेंशन और कई मोड भी उपलब्ध कराता है। जिसके कारण लोग क्रोम से बाहर नहीं निकल पाते और बहुत सारी चीजें वहीं एक क्लिक पर पूरी हो जाती हैं। अब 25 साल के बाद माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर सिर्फ इतिहास में रह जाएगा।

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